नैनीताल: नवरात्र के मौके पर मां नैना देवी मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा. पहले नवरात्र के मौके पर नैनीताल समेत आसपास के लोगो के साथ साथ नैनीताल पहुंचें. पर्यटकों ने मां नैना देवी के दर्शन किए. नवरात्रि के पहले दिन नैनीताल के प्रसिद्ध मां नयना देवी मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी है. नैना देवी के अलावा पाषाण देवी मंदिर, गोलू देवता मंदिर, हनुमानगढ़, शीतला देवी, गंगनाथ मंदिर समेत कई अन्य मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा.
मान्यता है कि देवी सती की आंख यहां गिरी थी. इसी के बाद यहां मां नयना देवी की स्थापना हुई. देवी पार्वती का पार्थिव शरीर खंडित होने के बाद उनकी बांयी आंख यहां गिरी थी. पुराणों में वर्णित है कि देवी पार्वती के पिता दक्ष-प्रजापति ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया. यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रण नहीं दिया गया. अपने पिता के यहां हो रहे अनुष्ठान में माता पार्वती बिना आमंत्रण के पहुंच गई. उन्होंने देखा कि अनुष्ठान के दौरान सभी देवी देवताओं समेत अन्य लोगों के बैठने के लिए उपयुक्त स्थान है, लेकिन उनके पति के लिए कोई स्थान तक नहीं रखा गया है. जिससे माता सती काफी आक्रोशित हुई.
पिता द्वारा अपने पति की उपेक्षा से खिन्न होकर देवी पार्वती यज्ञ के हवन कुण्ड में कूदकर सती हो गई. माता के सती होने की सूचना के बाद भगवान शिव काफी क्रोधित हुए. उन्होंने पार्वती के शरीर को अग्निकुंड से निकाल कर पार्वती के पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्माण्ड के चक्कर लगाने शुरू कर दिया. भगवान शिव के क्रोध को देखकर ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया. प्रकृति का संतुलन बिगड़ने लगा. सृष्टि का सन्तुलन बिगड़ने से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया. तब सृष्टि के संरक्षक भगवान् विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव के खंड – खंड कर दिऐ. जिसके बाद माता पार्वती की बाई आँख यहां गिरी. जिसके बाद इस स्थान का नाम नैनीताल पड़ा. कहा जाता है मां सती के अंग जिस जिस स्थान पर गिरे उन स्थानों पर शक्तिपीठ का निर्माण हुआ. उन्हें में से एक शक्तिपीठ नैनीताल में भी स्थित है.