मुख्यमंत्री की घोषणाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश, मुख्य सचिव ने अधिकारियों को किया निर्देशित

देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री की घोषणाओं को लेकर यूं तो समीक्षा होना आम बात है लेकिन इस बार मुख्यमंत्री की ऐसी घोषणाओ पर भी बात हुई, जिन्हें तमाम निर्देशों के बाद भी पूरा नहीं किया जा पा रहा. खास बात यह है कि ऐसी योजनाओं को अब समाप्त करने का फैसला भी ले लिया गया है. योजनाओं को लेकर अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दे दिए गए हैं.

दरअसल मुख्यमंत्री की घोषणाओं और कार्य आधारित 10-10 घोषित कार्यों पर तेजी से काम आगे बढ़ाने के निर्देश दिए जाते रहे हैं. इसके बावजूद मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में समीक्षा के दौरान कई योजनाओं पर कार्य शत प्रतिशत पूरा नहीं होने की बात सामने आई है. इसी को देखते हुए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया है कि अधिकारी योजनाओं को लेकर स्थिति साफ कर दें, जिन योजनाओं को पूरा नहीं किया जा सकता उनको भी विलोपित करने का प्रस्ताव जल्द भेजा जाए.

समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री घोषणाओं के अंतर्गत जिन योजनाओं और परियोजनाओं को पूरा किया जाना है, उन्हें शीघ्रता से पूरा करने के लिए त्वरित कार्रवाई की जाए. वहीं जो योजनाएं किसी कारणवश व्यवहारिक नहीं रह गई हैं या जिन्हें पूरा करना संभव नहीं है, उनके संबंध में संबंधित विभाग 15 दिनों के भीतर विलोपन का प्रस्ताव मुख्यमंत्री घोषणा सेल को भेजें. मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा में यदि किसी विभाग की ओर से विलोपन का प्रस्ताव नहीं आता है तो यह माना जाएगा कि वह विभाग उस परियोजना को पूरा करने के लिए सहमत है और उस दिशा में काम आगे बढ़ाया जाएगा.

मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं का उद्देश्य राज्य के विकास कार्यों को गति देना है, ऐसे में वर्षों तक योजनाओं का लंबित रहना उचित नहीं है. इसलिए या तो योजनाओं को तेजी से पूरा किया जाए या फिर यदि वे व्यवहारिक नहीं हैं तो उन्हें समाप्त कर दिया जाए, ताकि प्रशासनिक ऊर्जा और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके.ऐसी कई परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई जो भूमि उपलब्ध न होने या विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण लंबे समय से अटकी हुई हैं. मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भूमि की समस्या आ रही है, उनके संबंध में संबंधित स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायकों और जिलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर स्थिति स्पष्ट की जाए.

यदि भूमि उपलब्ध कराई जा सकती है तो परियोजना को तुरंत आगे बढ़ाया जाए, नहीं तो ऐसी योजनाओं के विलोपन का प्रस्ताव तैयार किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि कई बार अंतर-विभागीय समन्वय के अभाव में भी परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पातीं. ऐसे मामलों में विभागों को आपसी समन्वय से जल्द समाधान निकालने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि परियोजनाओं पर समयबद्ध निर्णय लिया जा सके. बैठक में मुख्यमंत्री की 10-10 कार्य आधारित घोषणाओं के तहत चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई.

इस संबंध में विभागों को स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं. मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं के लिए साइट सिलेक्शन कमेटी की रिपोर्ट आवश्यक है, वहां यह रिपोर्ट जल्द से जल्द संलग्न की जाए, ताकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी न हो.विद्यालय शिक्षा विभाग से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर केंद्रीय विद्यालय की स्थापना प्रस्तावित है लेकिन सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है, वहां नियमों के अनुसार निजी या वन भूमि के विकल्पों की भी संभावनाएं तलाश की जाएं.

बैठक में गेस्ट हाउस निर्माण से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की गई. मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिन जनपदों में राज्य संपत्ति विभाग या लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस उपलब्ध नहीं हैं, वहां नए गेस्ट हाउस निर्माण के प्रस्ताव तैयार किए जाएं.इसके अलावा ऐसे कई प्रोजेक्ट भी सामने आए जो केवल नामकरण तय न होने के कारण लंबित हैं. मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विभागों, हितधारकों और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर नामकरण को लेकर जल्द निर्णय लिया जाए. यदि आवश्यकता हो तो नामकरण में परिवर्तन कर आगे की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए.

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