देहरादून: उत्तराखंड में किसानों की खेती के सामने जंगली जानवरों का संकट लगातार गहराता जा रहा है. पहाड़ी इलाकों से लेकर कई मैदानी क्षेत्रों तक बंदर, सूअर, नीलगाय और अन्य वन्यजीव किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. स्थिति यह है कि कई गांवों में किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. राज्य के पलायन आयोग की रिपोर्टों में भी यह बात सामने आ चुकी है कि जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाना ग्रामीण क्षेत्रों से हो रहे पलायन का एक बड़ा कारण बन गया है.
विभाग के लिए हालात चुनौतीपूर्व: ऐसे में किसानों की फसलों को सुरक्षित रखने के लिए खेतों की घेरबाड़ (फेंसिंग) सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त बजट की कमी राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है. हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से इस दिशा में राज्य को 25 करोड़ रुपये देने की बात कही गई है, लेकिन इसे किसानों की समस्या के मुकाबले बेहद कम माना जा रहा है. यही वजह है कि किसानों और कृषि विशेषज्ञों में असंतोष भी दिखाई दे रहा है.
पलायन की बड़ी वजह बन रहे जंगली जानवर: उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में खेती पहले ही कठिन परिस्थितियों में की जाती है. सीमित भूमि, सिंचाई की कमी और मौसम की अनिश्चितता के बीच किसान किसी तरह खेती करते हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों में जंगली जानवरों की संख्या बढ़ने की आशंकाओं से किसानों की मुश्किलें और बढ़ने की बात कही जाती हैं. राज्य के कई जिलों से मिली रिपोर्टों में सामने आया है कि बंदर, जंगली सूअर, साही और अन्य वन्यजीव खेतों में खड़ी फसलों को रातों-रात नष्ट कर देते हैं. कई गांवों में किसान दिन-रात खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं. इसके बावजूद फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है.