चारधाम यात्रा 2026: बाहरी राज्यों के वाहन स्वामियों को इन गाइडलाइन का करना होगा पालन, वरना होगा सख्त एक्शन

देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की तैयारियां जोरों पर चल रही है. इसी कड़ी में परिवहन विभाग ने चारधाम यात्रा में पारदर्शिता व सुगमता के लिए अहम फैसला लिया है. चारधाम यात्रा के दौरान दूसरे राज्यों से एनओसी लेकर वाहन देहरादून में पंजीकृत करके यात्रा में कमाई करते हैं. साथ ही यात्रा संपन्न होने पर देहरादून आरटीओ से एनओसी लेकर वापस अपने राज्य चले जाते हैं. ऐसे में उत्तराखंड के वाहन स्वामियों को खासा नुकसान होता है. लेकिन अब परिवहन विभाग ने दूसरे राज्यों से एनओसी लेकर आने वाले यात्री वाहनों के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है. उनके मूल पते या किराएनामे का पुलिस सत्यापन के बिना वाहनों का देहरादून संभाग में पंजीकरण पर रोक लगा दी गई है.

देहरादून आरटीओ संदीप सैनी ने बताया है कि कई बाहर देखा जाता है कि जब चारधाम यात्रा शुरू होती है तो कुछ बसें और टेंपो ट्रैवलर आरटीओ कार्यालय में रजिस्ट्रेशन का आवेदन करते हैं. विभाग के संज्ञान में आया है कि यह लोग यात्रा के दौरान अपना व्यवसाय करके फिर से एनओसी लेकर चले जाते हैं. जिसको ध्यान में रखते हुए इस बार कुछ बदलाव किए गए हैं. अब ऐसे मामलों में पुलिस वेरिफिकेशन किया जाएगा. अगर किसी व्यक्ति द्वारा आरटीओ कार्यालय में रजिस्ट्रेशन करने की प्रक्रिया कराई जाती है तो पुलिस वेरिफिकेशन होना अनिवार्य होगा.

अगर कंपनी है तो कंपनी का रजिस्ट्रेशन देना होगा और उसमें यह भी देखा जाएगा की कितनी गाड़ियां लेकर आ रहे हैं और इनकम टैक्स रिटर्न भी चेक किया जाएगा. सेकंड हैंड गाड़ियों पर सख्त नियम रखे गए हैं, जिससे प्रदेश में कहीं भी बिना नियमों के रजिस्ट्रेशन ना करवा पाए. साथ ही बताया है कि उत्तराखंड के ट्रैवल व्यापारी पूरे साल भर अपना काम करते हैं. अगर राज्य में कोई चुनाव या कोई अन्य कार्यक्रम होता है तो विभाग इन्हीं लोगों से गाड़ियों की डिमांड करता है. लेकिन चारधाम यात्रा के दौरान जो बाहरी राज्यों के वाहनों को फिल्टर आउट करने नियम लागू किया जा रहा है, ताकि विभाग के पास सही संख्या रहे.

  • वाहन स्वामी को स्थायी भवन स्वामित्व प्रमाण पत्र या पंजीकृत किरायानामा देना अनिवार्य होगा
  • स्थानीय पुलिस से वाहन स्वामी और किराएदार का सत्यापन प्रस्तुत करना होगा
  • फर्म की स्थिति में जीएसटी प्रमाण पत्र अनिवार्य देना होगा
  • संभागीय अधिकारी या निरीक्षक को संयुक्त तकनीकी और भौतिक जांच रिपोर्ट अनिवार्य
  • रिपोर्ट में वाहन के मूल रंग और भौतिक सत्यापन के दौरान दिखे रंग का जिक्र होना अनिवार्य
  • राज्य में नए वाहनों के लिए अधिकृत जीपीएस लगाना अनिवार्य
  • पिछले दो सालों में वाहनों पर हुए चालान की रिपोर्ट
  • वाहन स्वामी के पिछले 3 साल की आयकर रिटर्न रिपोर्ट
  • पूरी प्रक्रिया के बाद ही ट्रांसफर या पंजीकृत हो पाएगा

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