रेखा आर्या ने महिला स्पोर्ट्स हॉस्टल निर्माण कार्य को लेकर दिए सख्त निर्देश, कहा- गुणवत्ता से नहीं होगा समझौता

खटीमा: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद चंपावत जिले की लोहाघाट तहसील क्षेत्र में उत्तराखंड के पहले महिला स्पोर्ट्स हॉस्टल के निर्माण किया जा रहा है. जिसका खेल मंत्री रेखा आर्या, जिलाधिकारी चंपावत और खेल विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण किया. खेल विभाग के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को प्रदेश की महिला खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इस मौके पर खेल मंत्री रेखा आर्या ने प्रदेश की बेटियों के लिए खेल के क्षेत्र में बेहतर अवसर पैदा करने के क्षेत्र में उत्तराखंड के पहले महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के निर्माण को सरकार के द्वारा खेल के क्षेत्र में बेहतर कदम बताया. उन्होंने कहा की भविष्य में प्रदेश की बेटियां राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल सुविधाओं के द्वारा चमकने का काम करेंगी.उन्होंने 2027 तक महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के निर्माण अवधि तक पूर्ण करने के अधिकारियों को निर्देश दिए.

चंपावत जनपद के लोहाघाट क्षेत्र स्थित छमनिया में निर्माणाधीन उत्तराखंड के पहले महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री एवं राज्य की खेल मंत्री रेखा आर्या ने स्थलीय निरीक्षण किया. लगभग 237 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को उन्होंने प्रदेश की महिला खेल प्रतिभाओं के लिए मील का पत्थर बताया. निरीक्षण के दौरान मंत्री रेखा आर्या ने कार्यदायी संस्था एवं विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए. उन्होंने कहा कि गुणवत्ता या समयबद्धता में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.

रेखा आर्या ने लगभग पूर्ण हो चुके सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक का निरीक्षण किया और वहां अभ्यास कर रही महिला खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया. खिलाड़ियों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि लोहाघाट का यह महिला स्पोर्ट्स कॉलेज आने वाले समय में उत्तराखंड के लिए खेलों का पावर हाउस साबित होगा. रेखा आर्या ने कहा कि इस संस्थान के माध्यम से प्रदेश की बेटियों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे वे देश और दुनिया में उत्तराखंड का नाम रोशन करेंगी. उन्होंने बताया कि कॉलेज में सभी खेल ढांचे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किए जा रहे हैं.

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