विधानसभा विशेष सत्र में सीएम धामी ने दोहराया अपना संकल्प, सदन में बुधवार को जवाब देगी सरकार

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान आयोजित परिचर्चा में भाग लिया. इस दौरान उन्होंने राज्य गठन की पृष्ठभूमि से लेकर वर्तमान तक का विस्तृत खाका खींचा. साथ ही सदन के सामने आगामी सालों में उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का संकल्प दोहराया. वहीं, विशेष सत्र को चर्चा के लिए एक दिन और बढ़ाया गया है. ऐसे में बुधवार सरकार अपना जवाब देगी.

सभी मुख्यमंत्रियों का योगदान सराहा: मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने कहा कि अटल सरकार के कार्यकाल में राज्य स्थापना के साथ ही केंद्र सरकार की ओर से राज्य को विशेष आर्थिक पैकेज दिया गया. जिसके माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी और भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में राज्य में जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ पर्यटन विकास, औद्योगिक विस्तार और आर्थिक सुधारों का नया दौर शुरू हुआ.

उसके बाद साल 2002 में राज्य के प्रथम विधानसभा चुनाव के बाद नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनी. उनके नेतृत्व में राज्य में प्रशासनिक स्थिरता स्थापित करने, औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में कई अहम निर्णय लिए गए.

साल 2007 के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का कार्यकाल सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की नीति पर केंद्रित रहा. इसके बाद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के मुख्यमंत्रित्व काल में भी कई ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से राज्य का चहुंमुखी विकास सुनिश्चित हुआ.

इसी कड़ी में साल 2012 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता ने कांग्रेस को सत्ता सौंपी. ये कालखंड राज्य के लिए राजनीतिक अस्थिरता, प्राकृतिक आपदाओं और विभिन्न चुनौतियों का दौर रहा. इसी दौरान केंद्र सरकार के सहयोग से केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्य शुरू किए गए, जिन्होंने 2013 की भीषण आपदा के बाद श्रद्धालुओं के विश्वास को पुनर्स्थापित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई.

जबकि, साल 2017 में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को प्रचंड बहुमत से जीत हासिल हुई, जिसमें त्रिवेंद्र सिंह रावत को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का अवसर मिला. उनके नेतृत्व में राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासन की दिशा में अनेक अहम सुधार शुरू किए गए.

उनके बाद तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालते हुए अल्प अवधि में ही हरिद्वार कुंभ जैसे विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजन का कोरोना जैसी महामारी के बीच सफल आयोजन कराया. इस तरह से तमाम मुख्यमंत्रियों का अपना-अपना योगदान रहा.

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