नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल ने 1986 के बाद बसे रामनगर के पुछड़ी गांव के 250 मकानों का ध्वस्तीकरण करने के मामले पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने फिलहाल प्राधिकरण के आदेश पर रोक लगा दी है.
पुछड़ी गांव के हजारों निवासियों को राहत: मंगलवार को नैनीताल हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जिला विकास प्राधिकरण ने कोर्ट में जानकारी दी है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश का पालन करे बगैर वो कोई भी कार्रवाई आगे नहीं करेंगे. इसके लिए वो एक पोर्टल भी बनाएंगे. मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने 15 दिन वाले प्राधिकरण के नोटिस को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना माना है.
250 मकान ध्वस्तीकरण के नोटिस पर रोक: दरअसल नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण ने रामनगर के पुछड़ी गांव के करीब 250 परिवारों के मकान दुकानों को ध्वस्तीकरण करने का नोटिस 30 जुलाई 2025 को भेजा था. नोटिस में कहा गया था कि 1986 के आदेश के तहत ये क्षेत्र मास्टर प्लान के तहत हरित या ओपन क्षेत्र रहेगा. लिहाजा 15 दिनों के भीतर खुद ही मकानों को ध्वस्त कर लें. इस नोटिस को गांव वासियों सहित अन्य प्रभावित लोगों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है.
पोर्टल बनाकर सभी पक्षों की बात सुनी जाएगी: डीएम के कंट्रोल में एक पोर्टल बनाना अनिवार्य है. जिसमें पक्ष को सुने बगैर कोई अग्रिम कार्रवाई नहीं की जा सकती है. अगर इनका उल्लंघन हुआ तो कार्रवाई को अवैध माना जा सकता है. जिसके बाद कोर्ट ने प्राधिकरण को कहा कि क्यों ना उनके ऊपर अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी जाए. क्योंकि उनके द्वारा सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया है. इस पर प्राधिकरण की तरफ से कहा गया कि वे सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का अनुपालन करेंगे. तब तक वे जारी अतिक्रमण हटाने के नोटिस पर कोई अग्रिम कार्रवाई नहीं करेंगे.