गढ़वाल में पहली बार सरकारी अस्पताल में मुफ्त हेयर ट्रांसप्लांट, FUE तकनीक से दूर होगी गंजेपन की समस्या

श्रीनगर गढ़वाल: पर्वतीय जिलों के उन लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है, जो गंजेपन की समस्या के कारण लंबे समय से परेशान हैं और महंगे हेयर ट्रांसप्लांट का खर्च वहन नहीं कर पाते. पौड़ी गढ़वाल के राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल में पहली बार FUE (फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन) तकनीक से हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू कर दी गई है. खास बात यह है कि यह सुविधा मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है. इससे पूर्व विभाग में फोटोथेरेपी और लेजर तकनीकी से मरीजों का इलाज होता आ रहा है.

बेस अस्पताल के त्वचा रोग विभाग (डर्मेटोलॉजी) में विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक डिमरी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती के प्रयासों से इस सेवा की शुरुआत की गई है. इसके तहत पुरुषों में होने वाले गंजेपन की समस्या के उपचार के लिए FUE तकनीक से हेयर ट्रांसप्लांट किया जा रहा है. विभाग में इस सेवा के शुरू होने के बाद चिकित्सकों एवं मेडिकल छात्रों में भी उत्साह है.

कैसी होती है प्रक्रिया: FUE यानी Follicular Unit Extraction हेयर ट्रांसप्लांट की आधुनिक तकनीकों में से एक है. इसमें सिर के उस हिस्से से, जहां बालों की जड़ें मजबूत होती हैं, छोटे-छोटे फॉलिक्युलर यूनिट यानी हेयर ग्राफ्ट निकाले जाते हैं और उन्हें गंजेपन से प्रभावित हिस्से में प्रत्यारोपित किया जाता है. इस तकनीक में प्रत्येक ग्राफ्ट को सावधानीपूर्वक निकालकर निर्धारित स्थान पर लगाया जाता है.

बेस अस्पताल की त्वचा रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती ने कहा कि, मरीज की आवश्यकता और गंजेपन की स्थिति के आधार पर सामान्यत: 1 हजार से 5 हजार तक ग्राफ्ट लगाए जा सकते हैं. हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में मरीज की स्थिति के अनुसार समय भी अलग-अलग हो सकता है.

हेयर ट्रांसप्लांट को आमतौर पर महंगी कॉस्मेटिक चिकित्सा प्रक्रिया माना जाता है. निजी क्लीनिकों एवं अस्पतालों में इसकी लागत, डॉक्टर, तकनीक, ग्राफ्ट की संख्या और संस्थान के अनुसार अलग-अलग होती है. सामान्य तौर पर प्रति ग्राफ्ट/बाल की दर के आधार पर उपचार का खर्च काफी अधिक हो सकता है और कई मामलों में करीब डेढ़ लाख से पांच लाख रुपये या इससे अधिक तक पहुंच जाता है.
– डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती, असिस्टेंट प्रोफेसर, त्वचा रोग विभाग –

हेयर ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने के पीछे डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती ने एक खास संकल्प भी जुड़ा बताया. उन्होंने बताया कि, एम्स से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मन में ठाना था कि डर्मेटोलॉजी के क्षेत्र में जो उपचार सबसे महंगा होगा, उसे जरूरतमंद मरीजों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगी. राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस अस्पताल में सेवा देने का अवसर मिला तो उन्होंने अपने इस संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ाया और यहां हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू की.

गंजेपन की समस्या से परेशान लोग बेस अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में संपर्क कर इस सेवा का लाभ ले सकते हैं. मरीज की स्थिति का चिकित्सकीय परीक्षण करने के बाद यह तय किया जाएगा कि उसके लिए हेयर ट्रांसप्लांट उपयुक्त है या नहीं.
– डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती, असिस्टेंट प्रोफेसर, त्वचा रोग विभाग –

मरीजों के साथ मेडिकल छात्रों के लिए भी बड़ा मौका: बेस अस्पताल में हेयर ट्रांसप्लांट सेवा शुरू होने का लाभ केवल मरीजों तक सीमित नहीं रहेगा. राजकीय मेडिकल कॉलेज में यूजी और पीजी स्तर पर अध्ययन कर रहे मेडिकल छात्रों को भी आधुनिक हेयर ट्रांसप्लांट तकनीक को नजदीक से समझने और सीखने का अवसर मिलेगा.

त्वचा रोग विभाग में इस तरह की अत्याधुनिक प्रक्रिया शुरू होने से मेडिकल शिक्षा और क्लीनिकल ट्रेनिंग को भी मजबूती मिलेगी. छात्रों को हेयर लॉस, गंजेपन के विभिन्न पैटर्न, मरीज के चयन, हेयर फॉलिकल की पहचान, ग्राफ्ट निकालने और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिलेगा.

वहीं, त्वचा रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. दीपक डिमरी ने बताया कि, चिकित्सकों का कहना है कि हेयर ट्रांसप्लांट हर मरीज के लिए आवश्यक या उपयुक्त नहीं होता. इसलिए इच्छुक मरीजों का पहले विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परीक्षण किया जाएगा और उनकी समस्या, बालों की स्थिति तथा उपलब्ध हेयर डोनर एरिया का आकलन करने के बाद उपचार की उपयुक्तता तय की जाएगी.

विभाग में हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने से मरीजों को आधुनिक उपचार की एक और महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध हुई है. इससे पहले भी विभाग में फोटोथेरेपी और लेजर तकनीक के माध्यम से विभिन्न त्वचा रोगों का उपचार किया जा रहा है, जो क्षेत्र के अन्य अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है. हमारा प्रयास है कि मरीजों को अत्याधुनिक उपचार सुविधाएं विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में यहीं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उन्हें उपचार के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े.
– डॉ. दीपक डिमरी, एचओडी त्वचा रोग विभाग बेस अस्पताल श्रीनगर –

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