मसूरी: उत्तराखंड में बारिश का दौर जारी है. वहीं पहाड़ों में बारिश शुरू होते ही मसूरी की लाइफलाइन कही जाने वाली मसूरी-देहरादून सड़क पर भूस्खलन का खतरा फिर सामने आ गया. मैगी प्वाइंट के ऊपर अचानक पहाड़ी दरकने से मलबा और बड़े पत्थर सड़क पर गिरे. जिससे मार्ग बाधित हो गया और कुछ समय के लिए यातायात की रफ्तार थम गई. गनीमत रही कि मलबा गिरने के दौरान कोई वाहन इसकी चपेट में नहीं आया. मलबा आने की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग की टीम जेसीबी लेकर मौके पर पहुंची. करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद सड़क से मलबा और बोल्डर हटाकर यातायात सुचारू किया गया. हालांकि, बारिश के बीच पहाड़ी से दोबारा मलबा गिरने का खतरा बना हुआ है.
भूस्खलन का स्थायी समाधान की मांग: मसूरी-देहरादून मार्ग पर बारिश के दौरान भूस्खलन कोई नई समस्या नहीं है. हर बार मलबा हटाकर सड़क खोल दी जाती है, लेकिन संवेदनशील पहाड़ियों का स्थायी उपचार नहीं होने से अगली बारिश में फिर वही स्थिति बन जाती है. पर्यटन सीजन में मसूरी आने-जाने वाले वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है. ऐसे में मुख्य मार्ग यदि लंबे समय तक बंद हो जाए तो स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों, कर्मचारियों और जरूरी सेवाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को तत्काल मौके पर भेजकर सड़क पर आए मलबे और पत्थरों को हटाने के निर्देश दिए गए. विभाग ने जेसीबी के माध्यम से मार्ग साफ कर यातायात सुचारू कर दिया है.
-राहुल आनंद,एसडीएम मसूरी-
किमाड़ी मार्ग पर भी ‘विकल्प’ खुद खतरे में: मुख्य मार्ग के विकल्प के तौर पर किमाड़ी मार्ग को मजबूत करने की मांग लगातार की जा रही है. किमाड़ी रोड पर भी कई जगह भूस्खलन और सड़क धंसने का खतरा है. ऐसे में इसे वैकल्पिक मार्ग बनाने से पहले संवेदनशील हिस्सों का सर्वे, सुरक्षा दीवार, पैरापिट और जल निकासी की व्यवस्था जरूरी है. वन विभाग, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन से संयुक्त निरीक्षण कर किमाड़ी मार्ग की स्थिति का आकलन कर और दीर्घकालीन कार्ययोजना बनाने की मांग स्थानीय लोगों ने की है.
बता दें कि उत्तराखंड में भारी बारिश से भूस्खलन की घटनाएं देखने को मिल रही है. कई मार्ग मलबा और बोल्डर गिरने से लगातार बाधित हो रहे हैं. जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.