फिल्मी कहानी की तरह 8 साल पहले मां से बिछड़े थे दो बेटे, ऑपरेशन स्माइल ने बेटे को मां से मिलाया, छलके आंसू – News of Uttarakhand

फिल्मी कहानी की तरह 8 साल पहले मां से बिछड़े थे दो बेटे, ऑपरेशन स्माइल ने बेटे को मां से मिलाया, छलके आंसू

हरिद्वार: एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट हरिद्वार ने आठ साल पहले बिछड़े बेटे को खोजकर मां से मिला दिया. बेटे को पाकर मां के आंसू छलक उठे. पिता की डांट से नाराज होकर दोनों बच्चे घर से बिना बताए भाग गए थे. एक बच्चे को तो टीम ने परिजनों से मिला दिया और अब मां ने अपने दूसरे बेटे को भी मिलाने की गुहार लगाई है. साथ ही मां ने टीम का आभार व्यक्त किया. जिस तरह से बेटा अपनी मां से मिला है, वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है.

सोमवार का दिन आठ वर्ष से अपने दो गुमशुदा बेटों से मिलने की आस में दर दर विभिन्न राज्यों भटक रही मां के लिए खुशियों को लेकर आया. बरेली, उत्तर प्रदेश की रहने वाली महिला उस दिन को जब भी याद करती है उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं. आठ साल पहले अपने पिता के डांटने से नाराज होकर 6 और 4 साल का बेटा घर से भाग गए थे और फिर कभी वापिस नहीं आए.

दोनों बच्चों की तलाश में पति पत्नी दर दर भटक रहे थे. जैसे जैसे जानकारी मिली विभिन्न शहरों विभिन्न राज्यों में हाथों में दोनों बालकों की फोटो लेकर सफर पर निकल पड़े. स्थानीय पुलिस थाने फरीदपुर बरेली में भी गुमशुदा बालकों की सूचना दी गई, पर कोई विशेष सफलता नहीं मिली. हर सुबह एक नई यात्रा, तलाश और उम्मीद से भरी होती थी, जो सांझ होते होते कही धूमिल हो जाती थी. यह सफर तब पूर्ण हुआ जब हरिद्वार की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने ऑपरेशन स्माइल के तहत बीती 16 मार्च को तीन बालकों को हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर प्लेट फार्म नंबर 5 पर खड़ी बांद्रा एक्सप्रेस से रेस्क्यू किया. तीनों बालकों की काउंसलिंग की गई तो पता चला कि उन बालकों में से एक किशोर वो भी है.

क्योंकि जब वो घर से भागा था तब उसकी उम्र महज छह साल थी. अधूरी जानकारी को ध्यान में रखते हुए बिहार, उत्तर प्रदेश के ग्राम केरूआ से मिलते जुलते नामों को तलाश कर उनके संबन्धित थाना क्षेत्र व ग्राम प्रधानों से जानकारी ली गई. साथ ही विभिन्न सूचना माध्यम जैसे सोशल मीडिया आदि का सहारा भी लिया गया. लेकिन पता नहीं चल रहा था. आखिर में 19 मार्च को आशा की नई किरण मिली और किशोर की मौसी से संपर्क हुआ. मौसी से पता चला कि उनकी बड़ी बहन दोनों बालकों की तलाश में गुजरात की तरफ गई है. इसके बाद मौसी हरिद्वार आई और किशोर व उसकी मां की वीडियो कॉलिंग के माध्यम से बात करवाई गई. वीडियो कॉलिंग के बाद मां भावुक हो उठी. मां ने अपने बच्चे को पहचान लिया और वह दिन आ ही गया जब आठ वर्ष की अपनों से बिछड़ने की पीड़ा का अंत हुआ.

किशोर व उसकी माता को बाल कल्याण समिति हरिद्वार के समक्ष आवश्यक विधिक कार्रवाई काउंसलिंग कर मां के सपुर्द किया गया. मां हरिद्वार पहुंची और इतने वक्त बाद अपने पुत्र से मिलकर एक मां की आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कान साफ झलक रही थी. जिसके लिए हरिद्वार पुलिस का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया.

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