देहरादून: उत्तराखंड में क्लाइमेट चेंज गंभीर समस्या बनी हुई है. यही वजह है कि उत्तराखंड सरकार पर्यावरण को लेकर तमाम एहतियात बरत रही है. इसी क्रम में परिवहन विभाग ने भी कमर कस ली है. उत्तराखंड राज्य में अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को ग्रीन सेस देने के साथ ही अपने वाहनों के दस्तावेज को भी दुरुस्त रखना होगा. दरअसल, उत्तराखंड परिवहन विभाग प्रदेश में बढ़ रहे वाहनों की दबाव और पर्यावरण को देखते हुए तमाम तरह के निर्णय दे रहा है, जिसमें मुख्य रूप से जहां एक ओर अन्य राज्यों से उत्तराखंड आने वाले वाहनों में ग्रीन सेस वसूला जा रहा है तो वहीं, दूसरी ओर परिवहन विभाग ने ई-डिटेक्शन प्रणाली भी शुरू कर दी है. जिसके तहत बिना बीमा, परमिट, प्रदूषण या फिटनेस वाहनों के ऑटोमेटिक चालान कट जाएंगे.
उत्तराखंड में हर साल लाखों की संख्या में अन्य राज्यों से वाहन आते हैं. जिससे वायु प्रदूषण होता है और दूसरी ओर सड़कों पर दबाव भी पड़ता है. यही नहीं, ट्रैफिक जाम के साथ ही सड़क दुर्घटनाएं भी एक बड़ी चुनौती रहती है. जिसको देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने ग्रीन सेस वसूलने की प्रक्रिया शुरू की है. उसके साथ ही अब परिवहन विभाग ने उत्तराखंड में आने वाले वाहनों के दस्तावेजों को लेकर भी बड़ा एक्शन शुरू कर दिया है. जिसके तहत उत्तराखंड राज्य में आने वाले जिन वाहनों के कागजात दुरुस्त नहीं हैं, उन वाहनों के चालान काटे जा रहे हैं. जिसके लिए परिवहन विभाग ने 19 जनवरी से ई-डिटेक्शन प्रणाली को लागू कर दिया है.
ई-डिटेक्शन प्रणाली के जरिए बीमा, परमिट, प्रदूषण, रोड टैक्स और फिटनेस आदि को जांच होगी. ऐसे में उत्तराखंड की सीमा में घुसने वाले जिन वाहनों के पास प्रमाण पत्र नहीं होंगे या उनका प्रमाण पत्र एक्सपायर हो चुका होगा तो उनकी गाड़ी का खुद ही चालान हो जाएगा. इसके लिए वाहनों के नंबर को परिवहन मंत्रालय के वाहन पोर्टल से रियल टाइम कनेक्ट किया गया है. लिहाजा, ई-डिटेक्शन प्रणाली से डाटाबेस में कोई भी दस्तावेज एक्सपायर या अवैध होने पर सिस्टम उसे डिफॉल्टर के रूप में चिह्नित कर देगा. साथ ही उस वाहन का चालान काटकर, वाहन स्वामी को एसएमएस के जरिए संदेश भेज दिया जाएगा. जिसका पूर्व में ट्रायल भी किया जा चुका है.
ई-डिटेक्शन प्रणाली, एक इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट का तरीक है. इस प्रणाली को सात टोल प्लाजा पर शुरू किया गया है. दरअसल, इन टोल प्लाजा के जरिए वाहनों की जानकारी परिवहन विभाग को मिल जाती है. ऐसे में वाहनों की सूची को ई-डिटेक्शन के जरिए वहां सॉफ्टवेयर से इंटरलिंक किया जाता है. इसके बाद यह जानकारी पता चल जाती है कि वाहनों के दस्तावेज वैध है या फिर एक्सपायर है. अगर वहां के दस्तावेज दुरुस्त नहीं है तो फिर ई-डिटेक्शन प्रणाली के जरिए ऑटोमेटिक वाहन का चालान कट जाता है. वाहनों को रोकने या फिर मैन्युअल चेक करने की जरूरत नहीं पड़ती है, बल्कि ऑटोमेटिक प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं.
शैलेश तिवारी, उप परिवहन आयुक्त
शैलेश तिवारी ने बताया कि प्रदेश में सात टोल प्लाजा हैं. जिससे वाहनों की जो लिस्ट मिलती है उन वाहनों के नंबर को लेकर ई- डिटेक्शन प्रणाली शुरू कर दिया गया है. इस प्रक्रिया से सबसे बड़ा फायदा यही है कि किसी भी वाहन को रोकने की जरूरत नहीं पड़ती है. इसके साथ ही जिन लोगों के चालान होंगे वह लोग अपने वाहन के दस्तावेजों को भविष्य में दुरुस्त रखेंगे. साथ ही बताया कि वाहनों से होने वाला प्रदूषण एक विषय है, ऐसे में परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है कि इस पर लगाम लगाने के लिए जो कार्रवाई की जा सकती है वो की जाएगी. यही नहीं रोड सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए भी ई-डिटेक्शन प्रणाली को शुरू किया गया है. क्योंकि, वाहनों के दस्तावेज सही नहीं होते हैं और अगर दुर्घटना हो जाती है तो क्लेम मिलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.