उत्तराखंड में कुदरत का ‘कहर’, 24 घंटे से भारी बारिश का सिलसिला जारी, 111 सड़कें बाधित, – DAMAGE DUE TO RAIN IN UTTARAKHAND

देहरादून: उत्तराखंड में हर साल मानसून सीजन के दौरान आपदा जैसी स्थिति बनती है. इसी क्रम में पिछले 24 घंटे के भीतर उत्तराखंड के तमाम हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते न सिर्फ सबसे अधिक सड़के बाधित हो गई हैं बल्कि प्रदेश की तमाम नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. जिसको देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा नदी नालों के किनारे रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश जारी किए गए हैं.

प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रविवार से लगातार हो रही भारी बारिश के चलते आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. एक तरफ पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है. जिसके कारण मैदानी इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. जिसको देखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बारिश के कारण बिगड़े हालातों पर सभी जिलाधिकारी के साथ बैठक की. बैठक के दौरान सीएम ने सभी जिलाधिकारी को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं. साथ ही सभी जिलाधिकारियों को अपनी टीम के साथ ग्राउंड जीरो पर रहने के लिए भी कहा गया है.

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड में 111 सड़कें बाधित हैं. जिसमें 5 एनएच, 8 एसएच, 1 बॉर्डर रोड, 41 पीडब्ल्यूडी, 56 पीएमजीएसवाई की सड़के शामिल हैं. इसके साथ ही आपदा की वजह से 1 जून 2025 से 04 अगस्त तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा, 18 लोग घायल और 8 लोग अभी भी लापता हैं. आपदा की वजह से तीन मकान पूरी तरह से, 24 मकान का आधा हिस्सा, 461 मकानों का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है. आपदा की वजह से पशुओं को भी काफी नुकसान हुआ है. एक जून से 4 अगस्त तक 32 बड़े पशुओं और 62 छोटे पशुओं की मौत हो चुकी है. इसके अलावा 15 गौशाला भी क्षतिग्रस्त हुआ है.

RAIN IN UTTARAKHAND

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, हरिद्वार जिले में गंगा नदी, रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा एवं मंदाकिनी नदी, उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी, चमोली जिले में अलकनंदा- नंदाकिनी एवं पिंडर नदी, पिथौरागढ़ जिले में काली नदी- गोरी नदी एवं सरयू नदी, बागेश्वर जिले में सरयू नदी एवं गोमती नदी, चंपावत जिले में शारदा नदी खतरे के निशान के समीप तक पहुंच गई है. जिसके चलते स्थानीय प्रशासन की ओर से लगातार लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि सभी लोग नदियों के किनारे से दूर रहे. इसके अलावा नदियों के किनारे रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की भी निर्देश दिए गए हैं.

उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते पहाड़ से लेकर मैदान तक लोगों मुश्किलें बढ़ गई हैं. राजधानी देहरादून के टपकेश्वर मंदिर के समीप से गुजरने वाली तमसा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है. जिसके चलते मंदिर के आसपास बने घाट जलमग्न हो गए हैं. सावन का चौथा सोमवार होने के बावजूद लोगों यहां लोगों को आने की अनुमति नहीं दी जा रही है. तमसा नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया है. प्रशासन लोगों से मंदिर से दूर रहने की सलाह दे रहा है. बारिश के चलते गंगा का जलस्तर भी बढ़ गया है. ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन पर बना घाट, गंगा में डूबने लगा है. यही नहीं, ऋषिकेश के पास नीलकंठ मार्ग पर जा रही गाड़ी पर पत्थर गिरने से गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. कोटद्वार में पहाड़ से बोल्डर गिरने से बोलेरो वाहन चपेट में आ गया. जिसके चलते वाहन में सवार दो व्यक्तियों की मौत और 4 लोग घायल हो गए.

उत्तराखंड में रविवार से ही प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला लगातार जारी है. मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटे के लिए प्रदेश के तमाम हिस्सों में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. खासकर, प्रदेश के 7 जिलों देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और बागेश्वर जिले में भारी बारिश का भी अलर्ट जारी किया गया है

पिछले 24 घंटे से लगातार प्रदेश में बारिश हो रही है. जिसके चलते कुछ सड़क मार्ग बाधित हुई हैं. साथ ही पत्थर गिरने की वजह से कुछ दुकानें क्षतिग्रस्त हुई हैं. नीलकंठ मार्ग पर एक गाड़ी के ऊपर बोल्डर गिरा है. सिरोबगड़ में बाधित सड़क मार्ग को खोल दिया गया है. बाकी अन्य कुछ जगहों पर रास्ता बाधित है. जिसको खोला जा रहा है.

विनोद कुमार सुमन, आपदा प्रबंधन सचिव

वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं. सीएम धामी ने कहा-

सभी जिलाधिकारियों को भारी बारिश को देखते हुए अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदियों के जल स्तर की निरंतर मॉनिटरिंग की जाए और भूस्खलन एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए.

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट

  1. 5 अगस्त को राज्य के नैनीताल, चंपावत, उधम सिंह नगर, बागेश्वर, पौड़ी, टिहरी और देहरादून के तमाम हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट के साथ ही राज्य के अन्य जिलों में कुछ जगहों पर भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है.
  2. 6 अगस्त को राज्य के देहरादून, नैनीताल, चंपावत, उधम सिंह नगर और बागेश्वर जिले के कुछ हिस्सों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है.
  3. 7 अगस्त को राज्य के देहरादून और पौड़ी जिले में कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ ही अन्य जिलों में कुछ जगहों पर भारी बारिश को लेकर येलो लैंड जारी किया गया है.
  4. 8 अगस्त को राज्य के नैनीताल और बागेश्वर जिले में भारी से भारी बारिश के साथ ही अन्य जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी करते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.

बारिश को देखते हुए तमाम डीएम को भेजा गया अलर्ट

  • हर स्तर पर तत्परता और सुरक्षा बनाये रखते हुए आवागमन में नियंत्रण बरता जाय.
  • किसी भी आपदा/दुर्घटना की स्थिति में तत्काल स्थलीय कार्यवाही करते हुए सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाय.
  • आपदा प्रबन्धन IRS प्रणाली के नामित सभी अधिकारी एवं विभागीय नोडल अधिकारी हाई अलर्ट में रहेंगे.
  • NH. PWD, PMGSY, ADB, BRO, WB, CPWD आदि किसी भी मोटर मार्ग के बाधित होने की दशा में उसे तत्काल खुलवाना सुनिश्चित करेंगे.
  • सभी राजस्व उपनिरीक्षक, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी अपने तैनाती क्षेत्रों में बने रहेंगे.
  • समस्त चौकी/थाने भी आपदा सम्बन्धी उपकरणों एवं वायरलैस सैट आदि सहित हाई अलर्ट में रहेंगे.
  • इस अवधि में किसी भी अधिकारी/कर्मचारी के मोबाईल /फोन स्विच ऑफ नहीं रहेंगे.
  • अधिकारीगण बरसाती, छाता, टार्च, हैलमेट, कुछ आवश्यक उपकरण और सामग्री अपने वाहनों में अपने स्तर से रखने की कार्यवाही करेंगे.
  • इस अवधि में लोगों के फंसे होने की स्थिति पर खाद्य सामग्री व मेडिकल की व्यवस्था की जाय.
  • विद्यार्थियों की सुरक्षा के दृष्टिगत विद्यालयों में सावधानी बरती जाय.
  • असामान्य मौसम, भारी बारिश की चेतावनियों के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों के आवागमन को अनुमति न दी जाये.
  • सम्बन्धित जिलों के जिला सूचना अधिकारी इस चेतावनी / सूचना को आम जनमानस तक पहुंचाए.
  • भू-स्खलन के लिए संवेदनशील मार्गों पर पहले से ही उपकरणों की व्यवस्था करें।

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