उत्तराखंड में प्राइम लोकेशन वाली प्रॉपर्टीज के लिए ढूंढे जा रहे प्राइवेट पार्टनर, जानिए क्या है प्लानिंग

देहरादून: उत्तराखंड में प्राइम लोकेशन वाली सरकारी संपत्तियों को अब सरकार निजी भागीदारी के जरिए संचालित करने की तैयारी कर रही है. कुछ संपत्तियों के लिए कैबिनेट से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि कई दूसरी संपत्तियों को भी इस मॉडल के तहत चिन्हित किया जा रहा है. सरकार की योजना इन संपत्तियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ करोड़ों रुपये का निवेश कराने की है. प्रस्तावित निवेश और इससे जुड़े खर्च पर एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी भी विचार कर चुकी है.

उत्तर प्रदेश से परिसंपत्ति बंटवारे के बाद उत्तराखंड के हिस्से में आई हरिद्वार की महत्वपूर्ण संपत्ति होटल अलकनंदा को अब पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर विकसित करने की तैयारी हो रही है. प्राइम लोकेशन पर मौजूद इस संपत्ति का पूरी तरह से कायाकल्प करने की योजना पर शासन स्तर पर विचार चल रहा है. प्रस्ताव के तहत पुराने होटल के स्थान पर आधुनिक सुविधाओं से लैस एक विशाल और आलीशान होटल विकसित करने की संभावना है. हालांकि अंतिम स्वरूप और निवेश मॉडल को लेकर फिलहाल एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी के स्तर पर मंथन जारी है.

सरकार का मानना है कि हरिद्वार जैसी महत्वपूर्ण पर्यटन नगरी में प्राइम लोकेशन पर मौजूद इस संपत्ति की व्यावसायिक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है. PPP मॉडल के जरिए निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश को जोड़कर होटल को नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी है. इससे एक तरफ पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी, वहीं दूसरी ओर सरकार के लिए राजस्व के नए स्रोत भी तैयार होने की उम्मीद है.

ऋषिकेश गेस्ट हाउस को आलीशान होटल में बदलने की तैयारी: होटल अलकनंदा के साथ ही लोक निर्माण विभाग के ऋषिकेश स्थित गेस्ट हाउस को भी PPP मॉडल के तहत विकसित करने की योजना है. प्रस्ताव के मुताबिक इस संपत्ति को फोर स्टार या उससे भी उच्च श्रेणी की सुविधाओं वाले होटल के रूप में विकसित किया जा सकता है. यहां कम से कम 100 कमरों वाला होटल तैयार करने का प्रस्ताव है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की संभावना है.

दरअसल ऋषिकेश देश-विदेश के पर्यटकों के लिए उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्रों में शामिल है. ऐसे में यहां मौजूद सरकारी संपत्ति को बेहतर तरीके से विकसित कर पर्यटन सुविधाओं के साथ-साथ राजस्व बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.

पांच गेस्ट हाउस को पहले ही मिल चुकी मंजूरी: राज्य में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ते दायरे को देखते हुए सरकार ने लोक निर्माण विभाग के पांच गेस्ट हाउस को निजी भागीदारी के जरिए संचालित करने का निर्णय पहले ही लिया है. इसके लिए कैबिनेट से भी मंजूरी मिल चुकी है. इनमें ऋषिकेश, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग का डूंगलबीटा, रानीखेत और हर्षिल के गेस्ट हाउस शामिल हैं.

इसके अलावा प्रदेशभर में करीब 12 से अधिक अन्य लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस भी चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें भविष्य में PPP मॉडल पर संचालित करने की योजना है. इन संपत्तियों की पहचान मुख्य रूप से उनकी लोकेशन, पर्यटन की संभावनाओं और मौजूदा राजस्व प्रदर्शन के आधार पर की जा रही है.

कम राजस्व देने वाली संपत्तियों पर निजी निवेश का सहारा: सरकार की कवायद के पीछे मुख्य वजह यह है कि कई सरकारी होटल और गेस्ट हाउस प्राइम लोकेशन पर होने के बावजूद अपेक्षा के अनुरूप राजस्व नहीं दे पा रहे हैं. ऐसे में इन संपत्तियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित करने और उनकी व्यावसायिक क्षमता बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता अपनाया जा रहा है.

फिलहाल निजी पार्टनर की तलाश के साथ ही परियोजनाओं के लिए पात्रता मापदंड और तकनीकी, वित्तीय एवं वाणिज्यिक ढांचे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है. सरकार की कोशिश है कि निजी निवेश के जरिए इन संपत्तियों को बेहतर पर्यटन सुविधाओं वाले आधुनिक होटल में बदला जाए.

चकराता से पिथौरागढ़ तक फाइव स्टार होटल की योजना: सरकारी संपत्तियों को PPP मॉडल पर विकसित करने के अलावा राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र में नए बड़े होटल प्रोजेक्ट भी तैयार कर रही है. उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड यानी UIIDB की ओर से इसके लिए कार्ययोजना तैयार की गई है. इसके तहत चकराता, रामगढ़, चंपावत और पिथौरागढ़ को चिन्हित किया गया है, जहां बड़े और उच्च श्रेणी के होटल प्रोजेक्ट विकसित किए जाने की योजना है.

प्रमुख सचिव नियोजन आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया राज्य में ऐसे कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है. इसके लिए शासन स्तर पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं.

वहीं लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे ने बताया पहले चरण में पांच गेस्ट हाउस चिन्हित किए गए हैं, जो बेहतर लोकेशन पर होने के बावजूद राजस्व के लिहाज से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे थे. इसके अलावा करीब 12 अन्य गेस्ट हाउस भी खराब प्रदर्शन के आधार पर निजी भागीदारी के लिए चिन्हित किए गए हैं.

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