रुद्रप्रयाग: जिले में अलग अलग इलाकों में इन दिनों गुलदार का आतंक देखने को मिल रहा है. जखोली ब्लॉक के कुनियाली, पांजना गांव में बीती रात एक साथ तीन गुलदारों की मौजूदगी ने पूरे क्षेत्र को दहशत में डाल दिया. ग्रामीणों के अनुसार गुलदारों ने एक निराश्रित बैल का शिकार किया. वहीं, सिन्द्रवाणी में आतंक का पर्याय बने गुलदार को पिंजरे में कैद कर लिया गया है. जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली.
सिन्द्रवाणी पिंजरे में कैद गुलदार, सवाल बरकरार: बता दें सिन्द्रवाणी गांव में 3 फरवरी को एक दिल दहला देने वाली घटना में पांच वर्षीय मासूम को गुलदार ने अपना निवाला बना लिया था. उस घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया. तब से ग्रामीण डर के साए में जीने को मजबूर थे. घटना के बाद प्रशासन और वन विभाग की नींद टूटी. क्षेत्र में कई स्थानों पर पिंजरे लगाए गए. कैमरा ट्रैप लगाए गए. लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया गया. इसी अभियान के तहत देर रात एक गुलदार पिंजरे में कैद हुआ.
पिंजरे में एक गुलदार पकड़ा गया है, लेकिन यह स्पष्ट करना अभी जल्दबाजी होगी कि यही वही आदमखोर गुलदार है या नहीं. फॉरेंसिक जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी. पकड़े गए गुलदार को जांच के लिए भेजा जा रहा है.
देवेंद्र सिंह पुण्डीर, उप वनाधिकारी अगस्त्यमुनि रेंज
वन विभाग ने साफ किया है कि सिन्द्रवाणी क्षेत्र में सर्च अभियान अभी खत्म नहीं किया जाएगा. अन्य पिंजरे, कैमरा ट्रैप और निगरानी उपकरणों के जरिए अभियान जारी रहेगा, ताकि किसी भी कीमत पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
जखोली ब्लॉक में गुलदार का आतंक: वहीं, जखोली में भी गुलदार का आतंक देखने को मिल रहा है. गुलदार के वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. जखोली ब्लॉक में ग्रामीण और गुलदारों के बीच संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है. कुनियाली, पांजना में एक साथ तीन गुलदारों का दिखना सिर्फ ग्रामीणों के लिए ही नहीं, बल्कि वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी खतरे की घंटी है.
विशेषज्ञ बताते हैं कि एक नर गुलदार को औसतन 20 से 30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है. जखोली की दक्षिणी रेंज में हालात इसके ठीक उलट हैं। खरियाल, देवल, मयाली, लम्बवाड़ और कुनियाली जैसे गांव महज 1–2 किलोमीटर की दूरी पर बसे हैं. इसी क्षेत्र में गुलदारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
इकोलॉजिकल कैरिंग कैपेसिटी पूरी तरह ध्वस्त: वर्ष 2024–25 के दौरान इसी क्षेत्र में मानव पर हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. जब किसी क्षेत्र में गुलदारों की संख्या उसकी प्राकृतिक इकोलॉजिकल कैरिंग कैपेसिटी से अधिक हो जाती है, तो गुलदारों के बीच आपसी संघर्ष बढ़ता है. कमजोर या युवा गुलदार आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करने लगते हैं. कुनियाली में तीन गुलदारों का एक साथ दिखना इस बात का सीधा संकेत है कि जंगलों में उनके लिए जगह कम पड़ रही है. अब गांव उनकी शिकार स्थली बनते जा रहे हैं.
सवालों के घेरे में वन विभाग: ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा, न तो गुलदारों की सही गणना हो रही है और न ही प्रभावित क्षेत्रों में ठोस सुरक्षा व्यवस्था हो पा रही है. अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या जखोली ब्लॉक अगला “हाई रिस्क ज़ोन” घोषित होगा?