रुद्रप्रयाग: रतूड़ा जिला पंचायत वार्ड में केदारनाथ यात्रा के दौरान पैदल यात्रा मार्ग पर घोड़ा-खच्चर का संचालन करके अपना रोजगार चलाने वाले एक युवा पवन कुमार ने शानदार जीत दर्ज की है. उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को एकतरफा अंदाज में 1577 मतों से पराजित किया. यह जीत इसलिये भी खास मानी जा रही है क्योंकि यह सीट रुद्रप्रयाग से भाजपा विधायक की घरेलू सीट है. ऐसे में यहां भाजपा प्रत्याशी को जीत न मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है.
27 वर्षीय युवा पवन कुमार का राजनीति से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. वह स्वाभाविक तरीके से अपना जीवन जी रहे थे. एमए पास युवा पवन कुमार का बचपन कई परेशानियों से भरा रहा. अनुसूचित जाति परिवार में जन्मे और आर्थिक तंगी के कारण काफी चुनौतियों का सामना करते हुये उन्होंने जिला पंचायत सदस्य का मुकाम हासिल करके अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की है. इस बीच वह केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर घोड़ा-खच्चर का संचालन कर अपना रोजगार कर रहे थे. उनका चुनाव लड़ने का कुछ मन नहीं था.

अचानक से रतूड़ा वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई. अपने सहयोगियों के दम पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की हामी भरी. धनपुर पट्टी के पाबौ गांव निवासी पवन कुमार को चुनाव जीताने में भाजपा-कांग्रेस के नेताओं के साथ ही वार्ड के धनपुर व रानीगढ़ पटटी के कई अन्य जनप्रतिनिधियों का साथ रहा. भाजपा व कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी से इतर पवन कुमार के लिये खुले मंचों पर आकर काम किया. पवन कुमार को विजय दिलाने में अहम भूमिका निभाई.

चुनाव जीतने के बाद युवा जिपंस पवन कुमार ने कहा जनता ने जो भरोसा उन पर जताया है, वह उस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे. रतूड़ा वार्ड में फैली समस्याओं का निराकरण करना उनकी पहली प्राथमिकता है. क्षेत्र की सड़कों, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि के क्षेत्र में लगातार कार्य किया जाएगा. क्षेत्र की हर एक समस्या का समाधान किया जाएगा. निर्दलीय प्रत्याशी पवन कुमार को चुनाव जीतवाने में अहम भूमिका निभाने वाले कांग्रेस जिला प्रवक्ता नरेन्द्र बिष्ट ने कहा धनपुर व रानीगढ़ पटटी के बीच पवन कुमार एक जिताऊ प्रत्याशी था. शिक्षित होने के साथ ही पवन कुमार का व्यवहार कुशल में भी अच्छा है.
मतगणना कर्मियों की लापरवाही से ग्रामीणों में आक्रोश: पंचायत चुनाव के परिणाम आने के बाद से अगस्त्यमुनि विकास खण्ड के बामसू ग्राम पंचायत में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है कि आखिर प्रधान कौन बना है ? मतगणना कर्मियों की लापरवाही कहें या भूल कहें कि विजयी संजय सिंह हुआ और रिकार्ड में संग्राम सिंह को विजयी बना दिया गया. ऐसे में प्रमाण पत्र निर्गत करने को लेकर दोनों पक्षों में बहस हो गई.
दरअसल, कल शाम जब मतगणना हुई तो संजय सिंह को विजयी घोषित किया गया. जिसके बाद वे जश्न मनाते हुए घर लौट गये. जब आज वे मतगणना स्थल पर प्रमाण पत्र लेने आये तो रजिस्टर में संग्राम सिंह को विजयी दिखाया गया. इसी समय संग्राम सिंह भी अपने समर्थकों के साथ प्रमाण पत्र लेने आ धमके. उनके पास पंचायत चुनाव की अधिकृत वेवसाइट की फोटो प्रतिलिपि थी. जिसमें संग्राम सिंह को विजयी दिखाया गया. वहीं, रजिस्टर में भी संग्राम सिंह दर्ज किया गया था. जिससे विवाद की स्थिति पैदा हुई. आरओ अतुल सेमवाल ने बताया मतगणना के बाद तीन प्रतियों में परिणाम पूर्ण कराने थे, परन्तु कर्मचारी द्वारा अपूर्ण प्रपत्र लाने पर उसे इसे पूर्ण करने के लिए कहा गया. इसी बीच एक अपूर्ण प्रति एनआईसी को चली गई. बाद में कर्मचारी ने सही प्रतियां लाने पर उसे एनआईसी को भेजा. तब तक एनआईसी इसे क्लोज कर चुका था. जिसकी वजह से संग्राम सिंह का नाम गलत चढ़ गया. सुबह एनआईसी से इस गलती को सुधारने को कहा.